दमोह

पौराणिक प्रेम कथाओं की प्रसिद्ध “नल-दमयंती” कथा की नायिका दमयंती के नाम के आधार पर इस क्षेत्र का नाम दमोह हुआ। इस क्षेत्र में पाषाण काल में मानव जीवन के साक्ष्य भी बहुलता से उपलब्ध होते हैं। यह मौर्य साम्राज्य का भी एक भाग हुआ करता था। यहाँ समुद्रगुप्त , चन्द्रगुप्त स्कन्द गुप्त कालीन स्थापत्य भी प्राप्त होता है।चेदि राजवंश के काल में यहां कलचुरी राजवंश का आधिपत्य था। मध्यकाल मे विश्व विख्यात वीरांगना दुर्गावती का नाम भी उल्लेखनीय है। इसने अकबर के सिपहसालार आसफ रवां को कई बार युद्ध मे बुरी तरह पराजित किया। सिंगौर गढ का दुर्ग भी मध्य कालीन दुर्ग शैली मे में एक महत्वपूर्ण निर्माण है। यहाँ के कुडनपुर के जैन मंदिर भी जैन आस्था के केंद्रं हैं। जोगेश्वर धाम मंदिर शिव भक्तो का बडा श्रद्धा स्थल है। प्रशासनिक रूप से १८६१ में दमोह जिले का निर्माण हुआ । यहा की पथरिया तहसील में जन्में माधव राव सप्रे को हिन्दी की लघुकथा का जनक माना जाता है। सुरम्य प्राकृतिक स्थलो मे कटगीं स्थित निदान जल प्रपात दर्शनीय है। 2017 मे रेल स्वच्छता सर्वे में दमोह जिले ने ९ वां स्थान प्राप्त किया है।

 

 

 

 

 

 

 

बंदर कोला तालाब